Wednesday, July 16, 2014

सोचती हूँ

सूरज सी रोशन हर दिशा ज़मीं पर,
फिर आँखें सितारे क्यों ढूँढती हैं...
झिलमिला जाएं कभी कहीं वह,
एक पल चमक कर, क्यों झुकती हैं

आंधी सी तेज़ हवा चंचल चलती,
बह न जाए उसमें एक कागज़ कहीं...
क्या लिख दिया उस कागज़ में भला,
मन की धड़कनें तेज़ क्यों चलती हैं

संजोए हीरे सा अनमोल एक राज़,
है तो ज़रूर दिल को उस पर नाज़,
छलक न उठे क्यों उसकी रौशनी...
सिमटी सी ही दिल में क्यों रहती है

-BhairaviParag

पलकों पे रहते हैं

सुना कई बार बड़ी सुन्दर है इन आँखों की चमक...
राज़ ना है छुपा, पर फिर भी आज बताते हैं.
कदम जब पड़ते, ज़मीन पर क्यों फूल बिछ जाए,
क्यों हँसी आँखों से हर एक पल छलकी जाए

धुप सुनहरी, छाँव शीतल, क्यों सम ही लगती,
नींद आए जब, क्यों सपने मधुर गुनगुनाएं
बस इशारे ही कैसे मन की बात बता जाते,
सारा संसार कैसे क़दमों में सिमट जाए

क्यों है विश्वास सा, की सब है जैसा होना था,
क्यों साथ साहसों की राह निकल पड़ते हैं,
बादलों से हलके क्यों ना उड़े आसमानों में... 
एक दूजे की पलकों पे रहा करते हैं!

- BhairaviParag   :)

उस तारे को

सितारा तुम दूर
एक हो लाखों में
प्रकाश हल्का शीतल
देते रहते, छंटता अंधेरा
ऐसा क्यों लगता
तुम हो अपने से
हाथ बढाऊँ जो
मिल जाओगे
प्यारे नाज़ुक फूल से
सजाकर रखूं मंदिर में
पूजा करता रहे यह मन
दिशा कल्याणी सदा
दिखाते रहो तुम
झिलमिलाते मुस्कुराते
हमेशा की तरह

-BhairaviParag 

Monday, June 02, 2014

भारत चला सिंह की चाल


गए दिन अब संशय के
मन ले दृढ विश्वास
नयी शुरुआतों की ओर
भारत चला सिंह की चाल


कृतज्ञता साहस और निष्ठा
आत्म श्रद्धा की निधि साकार
सहस्त्र शुभ संकल्प लिए
भारत चला सिंह की चाल


वीर धीर नेता को मान्य कर
जनता ने आशीष दिया
विजय तिलक से कर सुशोभित
भारत चला सिंह की चाल


साथ सारे बढ़ेंगे मिलकर
स्नेहबंध से मिलझुल कर
वसुधा कुटुम्ब ही यह वचन देता
भारत चला सिंह की चाल


जगद्जननी दुर्गा, सरस्वती
लक्ष्मी की कृपा रहे अपार
भावपूर्ण आर्त प्रार्थना कर
भारत चला सिंह की चाल


तेज ऐसा झगमग फैला
देखे आज सारा संसार
गौरव पुनःस्थापित करना अब
भारत चला सिंह की चाल


-Bhairavi Parag Ashar

This one came on May26, 2014 , Obvious reason :)




तुम्हारा नाम मुस्कान रखा है


गम हो या ख़ुशी, ख़ूबसूरत है ज़िन्दगी,
सँवर गयी, रब का जैसे साथ मिला है
जब नाम लूँ, एक लहर सी आती है
तुम्हारा नाम मुस्कान रखा है

गम के घेरे में भी एक सुकून की झलक
जैसे तूफ़ान में मुस्काते तिनके की नज़ाकत
या ज्यों आंधियों में रौशन एक दिये की मासूमियत
जब दिखे, लगता है रब ने तेरा जिक्र किया है

न कहूँगी कभी, रूठ मत जाना...
जानती हूँ यह रिश्ता पुराना है ।
होठों पे जब से तुम्हारा नाम सजाया है
सौभाग्य मेरा, हर श्वास पर उत्सव मनाया है ।

-BhairaviParag